नर्मदा नदी, विश्व की चुनिंदा और बेहद प्राचीन नदियों में से एक है. यूं समझिये कि ये नदी, गंगा और हिमालय से भी पुरानी है. ये भारत की कई बड़ी नदियों से भी पुरानी नदी है. मगर अब तक ये पता नहीं चल पाया है कि इसका उद्गम पृथ्वी के किस काल खंड में हुआ था.
नर्मदा अपने आप में पृथ्वी के अरबों साल के इतिहास को संजोये हुए है. वैसे तो ये नदी पूर्व से पश्चिम की तरफ़ भारत के बीच-ओ-बीच बहती है और देश के उतर और दक्षिण भू-भाग को स्पष्ट रूप रेखांकित करती है – वो भी प्ररितिक रूप से.
ये एकमात्र ऐसी नदी है जो अरब की खाड़ी में जाकर समा जाती है. ये भी बहुत महत्वपूर्ण बात है कि इसका कोई ‘डेल्टा’ क्षेत्र नहीं है.
‘डेल्टा’
शब्दकोष में ‘डेल्टा’ को कुछ इस तरह परिभाषित किया गया है – “’डेल्टा’, वो क्षेत्र है जो अमूमन नदी के मुहाने पर होता है जब वो साग़र में जाकर समा जाती है. इसमें नदी द्वारा बहाकर लाए गए अवसादों; जैसे मिट्टी, रेत, या गाद के जमाव से बन्ने वाली एक त्रिभुजाकार भू-आकृति होती है जो पंखे के आकार की उपजाऊ ज़मीन होती है. जब भी कोई नदी या तो साग़र या झील में जाकर मिलती है, तो उसका बहाव धीमा होने लगता है और इस वजह से अवसाद जमा होने लगते हैं. नदी इस स्थान पर कई शाखाओं में बंट जाती है.”
प्राचीन कुंड का रहस्य
अनूपपुर ज़िले के अमरकंटक में नर्मदा का कुंड है जहां से ये नदी निकलती है. ये कुंड, विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वतश्रेणियों पर मौजूद है जहां से ये निकली है और 1312 किलोमीटर का सफ़र तय कर ये अरब सागर में समा जाती है. नर्मदा का ये सफ़र सिर्फ़ 1312 किलोमीटर के लम्बाई का नज़र ज़रूर अता है. मगर, काल खंड में इसका ये सफ़र कितना लंबा रहा है उसपर शोध चल ही रहा है.
नर्मदा का बहाव चट्टानों के बीच निर्धारित मार्ग पर ही है. लेकिन जब विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों से ये आगे निकलती है तो फिर ये जलोढ़ मिट्टी के उपजाऊ मैदान में प्रवेश करती है. नर्मदा के उपजाऊ मैदानी इलाकों को ही नर्मदा घाटी के नाम से जाना जाता है. ये घाटी 320 किलोमीटर तक फैली हुई है.
नर्मदा के इस सफ़र में इसके कुछ और हमसफ़र - यानी नदियाँ – भी हैं. ये नदियाँ नर्मदा में शामिल हो जाती हैं. लेकिन नर्मदा को लेकर कई सवाल अब भी अनुतरित हैं, और वो हैं कि अमरकंटक के कुंड से ये कब बहनी शुरू हुई थी. पृथ्वी विज्ञान के शोधकर्ताओं का कहना है कि नर्मदा 160 मिल्लियन सालों से बह रही है. यानी 160 मिल्लियन सालों से नर्मदा अमरकंटक के कुंड से बहती आ रही है. ये बिलकुल अदभूत है. हालांकि इसको लेकर धार्मिक मान्यताएं भी मौजूद हैं. मगर भू-वैज्ञानिक अब भी इसको लेकर शोध ही कर रहे हैं.
इन्टरनेट को खंगालते हुए ‘चार्ल्स डार्विन’ की "ओरिजिन ऑफ स्पीशीज़" नामक किताब की चर्चा भी सामने आई. इस किताब के आने से पहले, यानी डार्विन के ‘थ्योरी’ से पहले आम धारणा थी कि सभी जीवों और पेड़ पौधों, नदियों और पहाड़ों को किसी ना किसी दिव्य शक्ति ने पैदा किया है.
लेकिन डार्विन की किताब ने हंगामा मचा दिया. ये किताब वर्ष 1859 में सबसे पहले छपी थी जिसके बाद सवाल पैदा होने लगे कि इंसान का विकास कब और किस जंतु अथवा जंतु समूह से हुआ है ? अगली पुस्तक में चार्ल्स डार्विन ने इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की और लिखा कि सिर्फ़ बंदर ही इंसान के पूर्वजों के आस पास आ सकता है.
नर्मदा के इस सफ़र में हम आगे इसकी विस्तृत चर्चा भी करेंगे.
किस काल खंड में हुई नर्मदा की उत्पत्ति ?
भूगर्भ शास्त्रियों, भूवैज्ञानिक, जीवाश्म वैज्ञानिक तथा पृथ्वी का अध्ययन करने वाले कई अन्य वैज्ञानिकों ने अपने शोध में विकिरणमितीय प्रमाणों के हवाले से पता लगाया है कि पृथ्वी की आयु लगभग 4.54 अरब वर्ष है.
समय के सबसे बड़े खंडों को ‘इओन’ कहा जाता है और पृथ्वी पर अब तक शोध में कुल चार ‘इओन’ निर्धारित किये गये हैं. इनमे ‘हेडियन’, आर्कीअन, प्रोटेरोज़ोइक और फ़ैनेरोज़ोइक शामिल हैं. शुरू के तीन इओनों को सामूहिक रूप से ‘कैम्ब्रीयनपूर्व महाइओन’ या ‘प्रीकैम्ब्रीयन सुपरईओन’ में विभाजित हैं.
इओन को आगे महाकल्प, जिसे अंग्रेजी में ‘एरा’ भी कहते हैं, वो उसे एरा में विभाजित करता है.
महाकल्प को कल्प यानी ‘पीरियड’ में विभाजित किया जाता है.
कल्प को युग में विभाजित किया जाता है.
और, युग को काल में विभाजित किया जाता है.
पृथ्वी के काल
कैम्ब्रियन कल्प से लेकर मौजूदा महाकल्प तक ये अनुमान लगाया जाता है कि पृथिवी का अब तक 50 करोड़ वर्षों का सफ़र रहा है. शोध में कैम्ब्रियन काल के ही पहली बार पाए जाने वाले जीवाश्म या ‘फॉसिल’ पाए गए हैं. इन जीवाश्मों की आयु 50 करोड़ वर्ष पूर्व की मानी गई है. लेकिन भूवैज्ञानिक कहते हैं कि 50 करोड़ साल पुराने जीवाश्म पाए जाने का ये मतलब भी नहीं है कि इससे पहले पृथ्वी पर जीवन था ही नहीं. (https://pubs.usgs.gov/gip/geotime/age.html)
प्रथम कशेरुकी जंतु की उत्पत्ति अनुमानतः 40 करोड़ वर्ष पूर्व हुई थी, जो ऑर्डोवशियन कल्प के नाम से जाना जाता है। विख्यात दैत्याकार डाइनासौर लगभग 20 करोड़ वर्ष पूर्व उत्पन्न हुए और प्रायः 1 करोड़ वर्षों तक पृथ्वी पर भ्रमण करते रहे। सात करोड़ वर्ष पूर्व स्तनपायी (mammals) जंतु प्रकट हुए और डायनासोर विलुप्त हो गए। मनुष्य के उत्पत्ति लगभग 10 लाख वर्ष पूर्व मानी जाती है।
जीवाश्मों तथा भूगर्भिक कालों में अटूट संबंध होता है। ये भूवैज्ञानिक काल कौन-कौन से हैं.
काल के नाम ‘क्रोनोस्ट्रैटिग्राफिक इकाइयों’ के लिए परिभाषित किए गए हैं. जैसे फ़ैन रोज़ोइक काल में एराथेम के नाम पृथ्वी पर जीवन के इतिहास में हुए प्रमुख परिवर्तनों को दर्शाने के लिए चुने गए थे: पैलियोज़ोइक (पुराना जीवन), मेसोज़ोइक (मध्य जीवन) और सेनोज़ोइक (नया जीवन).
पैलियोजीन, लिथोलॉजी, क्रेटेशियस, पर्मियन और ऑर्डोविशियन
अनौपचारिक रूप से, कैम्ब्रियन से पहले के समय को अक्सर प्रीकैम्ब्रियन या प्री-कैम्ब्रियन (सुपरईऑन) कहा जाता है
इस तरह हैं पृथ्वी के काल खंड
हेडियन (4.6 से 4.0 अरब वर्ष पूर्व का काल खंड): इस खंड में पृथ्वी का निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई, पिघली हुई अवस्था और ठोस पपड़ी का बनना।
आर्कियन (4.0 से 2.5 अरब वर्ष पूर्व): पहले महाद्वीप और एक कोशिकीय जीव का विकास.
प्रोटेरोज़ोइक (2.5 अरब - 541 मिलियन वर्ष पूर्व): वायुमंडल में ऑक्सीजन की वृद्धि और जटिल जीव (बहुकोशिकीय) की शुरुआत.
फैनेरोज़ोइक (541 मिलियन वर्ष पूर्व से वर्तमान): इसे तीन महाकल्पों में बांटा गया है:
पेलियोज़ोइक (प्राचीन जीवन जो 541 से 252 मिलियन वर्ष पूर्व): कैम्ब्रियन विस्फोट, समुद्री जीवन, मछलियां, और रेंगने वाले जीवों का उदय.
मेसोज़ोइक (मध्य जीवन जो 252 से 66 मिलियन वर्ष पूर्व): डायनासोर का युग, स्तनधारियों की उत्पत्ति.
सेनोज़ोइक ( नया जीवन जो 66 मिलियन वर्ष पूर्व - वर्तमान): स्तनधारियों का प्रभुत्व, मानव का उदय.
कब से बह रही है नर्मदा ?
अब तक के शोध में जो तथ्य सामने आये हैं, वो संकेत देते हैं कि नर्मदा का अस्तित्व अरबों वषों का है. पृथ्वी के कई काल खण्डों में नर्मदा के अस्तित्व की बात शोध में सामने आई है.
जीवाश्म विज्ञान या जीवाश्मिकी के शोध कार्यों में नर्मदा का बेहद महत्वपूर्ण स्थान है. भूवैज्ञानिक, नर्मदा घाटी पर लगातार शोध करते आ रहे हैं. पृथ्वी पर प्राचीन काल के विलुप्त हुए जीवन और पेड़ पौधों और जानवरों की जानकारी जुटाने में वो लगे हुए हैं.
पृथिवी और ब्रम्हांड की उत्पत्ति को लेकर शोध कर रहे भूविज्ञानियों की नर्मदा को लेकर काफ़ी रुचि रही है और शोध के दौरान कई चौंका देने वाले रहस्यों पर से पर्दा उठ पाया है. इसका मतलब ये हुआ कि नर्मदा नदी, मेसोज़ोइक कालखंड, यानी मध्य जीवन जो 252 से 66 मिलियन वर्ष पूर्व था, से बहती आ रही है.
हमारा प्रयास है कि नर्मदा से जुड़े हर पहलु को आप से साझा किया जाए. तो इस सफ़र में आइये हमारे साथ thenarmada.com पर जहां हम नर्मदा नदी से जुडी कई रोचक जानकारियाँ आप तक पहुंचाते रहेंगे.